Truth

दूसरों पर लगाने वाले इलजाम, कभी झांक कर देखकर अपना गिरेबान
झूठे तेरे वादे, झूठी तेरी मुस्कान
जानता हूँ मैं असलियत, नहीं मैं अंजान
फितरत है तेरी, पलट जाना देकर जुबान
देश को बाँट रहे तुम कहकर शमशान और कब्रिस्तान मजहब के नाम पर तुम लड़वा रहे, हिंदू, मुसलमान
सच तो है कि जनता तुम से है परेशान
लूट कर गरीबों को तुम दे रहे अमीरों को सोने की खान
कोई बन नहीं जाता देशभक्त, सिनेमा में चलवाकर राष्ट्र गान
पानी वाली दाल पीकर पहरा देता सीमा पर जवान
यह जान लो तुम्हारे बाप का नहीं है हिंदुस्तान ।

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About ajaykohli

Consultant ,deals in life management, psychology, astrology ,vaastu , fitness ,diet ,relationship counseling

Posted on February 28, 2017, in india, poetry. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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