गणतंत्र दिवस

कुछ यहां से कुछ वहां से चुरा कर बना दिया संविधान
मासूम मरें जेल में, खुले घूमे शैतान
चिंकारा ने की आत्महत्या, था बड़ा परेशान
ऐसे ही तुम बदनाम किए जा रहे हो सलमान
सोने के लिए नहीं होती सड़क
नेता, अभिनेता हो तो गाड़ी दौड़ायो बेधड़क
आठ, दस गाड़ी से दब कर मर गए, नहीं कोई परवाह
खुले आम बिकते हैं यहां गवाह
जो नहीं बिकता उसे दिया जाता है मार
पुलिस व सेना वाले ही बेचते गुंडो को हथियार
झक मार रहा कानून
होना चाहिए पैसा, फिर कर लो बलात्कार या खून
समानता, स्वतंत्रता बस नाम की
नेताओं ने वाट लगा रखी है जन जन आम की
जो सरकार आती है करती है मन मर्जी
60% वकील देश में हैं फर्जी
उच्चतम न्यायालय की कोई सुनता नहीं बात
नेता बाँट रहे देश बता कर धर्म, जात
जनता को पागल बना रहे, साईकिल, कमल या फिर हाथ
50 साल चलती रहे केस की सुनवाई
फैसला फिर भी न आए, मर जाए आदमी दे कर दुहाई
खूब करो घोटाले, धंधे काले
बस होने चाहिए नेता के, सांडू, साले
70 साल से हैं हमने आस्तीन के सांप पाले
गणतंत्र गया लेने तेल
संविधान लागू करने में सब सरकारें फेल
सब है जनता को पागल बनाने का खेल
गणतंत्र दिवस उस दिन मनाऊँगा जिस दिन भ्रष्ट नेताओं को होगी जेल ।

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Posted on January 25, 2017, in india, poetry. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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