विदेश

न जाने क्यों लोग जाते,हैं विदेश
छोड़ कर अपना वतन, अपना देश
कहां मिलेगी ऐसी कुल्लहड़ वाली चाय
पनवाड़ी की दुकान पर राजनीति पर राय
वो हलवाई की दुकान पर दूध वाली कड़ाई
वो बहन भाई की झूठ मूठ की लड़ाई
वो गाजर का हलवा
वो गर्म गुलाब जामुन का जलवा
वो सत्तु, वो चोखा लिटि
वो गालों पर लगी मुल्तानी मिट्टी
वो ढोकला, थेपला, श्री खंड
वो दिल्ली वाली ठंड
वो रसगुल्ला, वो संदेश
वो नयी वधू का गृह प्रवेश
वो वड़ा, साम्बर, डोसा
वो पहाड़ गंज वाला समोसा
वो चाँदनी चौक के छोले भटूरे, अमृतसर के नान
वो कुंभ के मेले, वो माघ स्नान
वो, यमन,भैरवी से राग
वो पीना लस्सी बना कर झाग
वो मक्की की रोटी वो सरसों का साग
वो बनारस के घाट, गया और प्रयाग
वो खाना मूंगफली तापते हुए आग
वो पाव भाजी, वो गोल गप्पे
वो भंगड़ा, गिद्दा और टप्पे
माना तुम लोग डॉलर में कमाते हो
हिंदुस्तानी होने से शर्माते हो
विदेशों के गुण गाते हो
पर अचार, पापड़ तो हिंदुस्तान से ही मंगवाते हो ।

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About ajaykohli

Consultant ,deals in life management, psychology, astrology ,vaastu , fitness ,diet ,relationship counseling

Posted on December 21, 2016, in india, poetry, relationship. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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